रानाथारू समुदायको पहिलो ऐतिहासिक साहित्य सम्मेलन पूरो

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धनगढी : ‘राना कला संस्कृति संरक्षण तथा विकास मञ्च’ को आयोजना औ नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानके सहयोग सहकार्यमें अगहन २३ गते शनिचरके ‘प्रथम रानाथारू भाषा-साहित्य सम्मेलन २०८०’ धनगढीमें भौ कार्यक्रम संयोजक पदम रानाके अध्यक्षतामें पूरो भौ है।

कार्यक्रममें रानाथारूकी संस्कृति दिखान औ बचान ताहीं औरे कार्यक्रम से दुसरे हानीं पहुननके सोफा, कुड्सीमें ना बैठाएके अपनो चला हानीं खटियामें दरी डारके स्वागत भौ रहे।

कार्यक्रमके सबसे बडे पहुना पूर्व वन औ वातावरणके मन्तरी नारदमुनि राना, बडे पहुना नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानके मातृभाषा विभागके मुखिया राजन मुकारुङ औ पहुना नेपाल रानाथारू समाजके अध्यक्ष कृपाराम राना, रानाथारू समाजकी पहिलेकि अध्यक्ष औ रानाथारू से पहिली पिएच.डी. करनबारी डाक्टर जीवन राना, धनगढी उपमहानगर कि उपमेयर कन्दकला राना, कृष्णपुर नगरपालिकाके मेयर हेमराज ओझा, उपमेयर द्रोपती राना, नेपाल औ भारतके बुद्धीजीवी, रानाथारू भाषाके अच्छे जनैया, लोक साहित्यकार, इतिहासकार, भाषाके पढन बारे पढीया फिर आए रहें।

कार्यक्रममें स्वागत संस्थाके अध्यक्ष करी रहें। ऐसी करके डाक्टर जीवन राना, डाक्टर नरेश राना (भारत), कमलसिंह राना मेल मेलके कार्यपत्र प्रस्तुत करी रहें। कार्यक्रममें रानाथारू भाषाके गीत, कविता, दुलम्मो ठडिया नाच, रानाथारू भाषा लिखन ताहीं तरिका औ व्याकरणके बारेमें खोब गहिरेसे छलफल भै रहे करके संयोजक पदम राना बताइ रहें।

कार्यक्रममें रानाथारू भाषाकि पहिली किताब ‘जगनकृत गीतमाला’ छपवाएके निकारनबारे जगना राना, रानाथारू समाजके शुरूमें स्थापना करनबारे लालबहादुर राना, रानाथारू समुदाय से पहिले मन्तरी लबरू रानाथारूके मरनेक बादम सम्मान करो गौ रहे। ऐसी करके समुदायसे पहिली पिएच.डी. करन बारी जीवन राना औ ‘रानाथारू भाषाका पदावलीको तुलनात्मक अध्ययन- २०६९’ के ताहीं चित्रराज भट्टके सम्मान करो गौ रहे। कार्यक्रमके संस्थाके सचिव भानुप्रताप राना चलाई रहें।

रानाथारू भाषा को मानक और व्याकरण के विषय मे सामूहिक छलफल भव रहय जा छलफल मे डा. जीवन राना, भक्तराज राना, राजकुमार राना, लछवीरा राना, रामकिसन राना सहभागी भए रहयँ और जा कार्यक्रमको सञ्चालन भाषाविद् चित्रराज भट्ट चलाइ रहयँ।

कार्यपत्र को टिप्पणी संविधानसभा सदस्य कृपाराम राना और सुदूरपश्चिम विश्वविद्यालय भाषा संस्कृति विभाग प्रमुख हरिषचन्द्र भट्ट करि रहयँ।

(नेपाली भाषामा)

धनगढी : ‘प्रथम रानाथारू भाषा-साहित्य सम्मेलन-२०८०’ शनिवार धनगढीमा सम्पन्न भएको छ। राना कला संस्कृति संरक्षण तथा विकास मञ्चको आयोजना तथा नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानको सहकार्यमा उक्त सम्मेलन गरिएको संयोजक पदम रानाले जानकारी दिएका छन्।

कार्यक्रममा रानाथारूको संस्कृतिको कार्यपत्र डा. जीवन राना, रानाथारू इतिहासको कार्यपत्र डा. नरेश राना, रानाथारू भाषाको अवस्थाको कार्यपत्र कमलसिंह रानाले प्रस्तुत गरेका थिए।

रानाथारू भाषाको पहिलो किताब (जगनकृत गीतमाला)का प्रकाशक जगना राना, समाजका संस्थापक लालबहादुर राना, समुदायबाट पहिलो मन्त्री लबरू रानाथारूलाई मरणोपरान्त सम्मान गरिएको थियो। समुदायबाट पहिलो विद्यावारिधि डा. जीवन राना र रानाथारू भाषाका पदावलीको तुलनात्मक अध्ययन -२०६९ का लागि चित्रराज भट्टलाई सम्मान गरिएको थियो।

कार्यक्रममा प्रमुख अतिथि पूर्व वन तथा वातावरणमन्त्री नारदमुनि राना, विशिष्ट अतिथि नेपाल प्रज्ञाप्रतिष्ठानका मातृ भाषा(साहित्य) विभाग प्रमुख राजन मुकारुङ, अतिथि नेपाल रानाथारू समाजका अध्यक्ष कृपाराम राना, नेपाल रानाथारू समाजका पूर्व अध्यक्ष तथा समुदायका प्रथम विद्यावारिधि डा. जीवन राना, धनगढी उपमहानगर उपप्रमुख कन्दकला राना, कृष्णपुर नगरप्रमुख मेयर हेमराज ओझा, उपमेयर द्रोपती राना, नेपाल तथा भारतका रानाथारू बुद्धिजीवी, रानाथारू भाषाका ज्ञाता, लोक साहित्यकार, इतिहासविद् तथा भाषाविद् सहभागी थिए।

कार्यक्रममा रानाथारू भाषाका गीत, कविता, साहित्यक रचना वाचन लगायत रानाथारू भाषा लेखन पद्धति र व्याकरणबारे गहन छलफल भएको छ। साथै लोक सांस्कृतिक प्रस्तुति एवं स्रष्टालाई सम्मानित गरिएको थियो।

 

 

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